The Free Dictionary  
mailing list For webmasters
Welcome Guest Forum Search | Active Topics | Members

मेरे सपनों का संसार Options
noorfr
Posted: Wednesday, March 9, 2011 4:21:20 AM

Rank: Advanced Member

Joined: 1/11/2011
Posts: 196
Neurons: 4,341
Location: New Delhi, NCT, India
सपने देखना हमारी प्रकृति है. हम सभी सपने देखते हैं. सोते हुए, और जागते हुए भी. ये सपने ही हमारे जीवन की सच्चाई हैं. हम कुछ करने, कुछ बनने का सपना देखते हैं. और उस सपने को हकीक़त में बदलने के लिये अपना सारा जीवन लगा देते हैं. ये वे सपने हैं जो हम खुली आँखों से देखते हैं. बंद आँखों के सपनों पर हमारा ज़ोर नहीं चलता. हम बस उन्हें देखते हैं. मंच पर चल रहें नाटक की तरह जिसके मुख्य पात्र भी हम खुद हैं. ये सपने अक्सर हमें परेशान करते हैं, कि हमने ये देखा तो क्यूँ देखा? क्या, मतलब क्या है इस सपने का?

ऐसा ही कोई सपना अगर परेशान कर रहा है आप को, या नहीं भी कर रहा है, तो यहाँ लिखिये. फिर देखिये कि यहाँ एक से बढ़ कर एक बैठे हैं. ऐसे ऐसे अर्थ निकलेंगे कि ईश्वर भी अपना सर पीट लेगा उन्हें पढ़ कर. और वह तो यह भी नहीं कह सकता कि हे ईश्वर, मेरा ये अर्थ नहीं था.....
Gunjika
Posted: Wednesday, March 9, 2011 4:40:40 AM
Rank: Advanced Member

Joined: 1/10/2011
Posts: 376
Neurons: 1,127
Location: India
इस सूत्र के रचनाकार का धन्यवाद | मेरे सपनों के बारे में तो आप जानते ही होंगे, जो मुझे बरसों तक परेशान करते रहे और अचानक बंद हो गए | अब मैं एक औद्योगिक इकाई में एच आर मैनेजर हूँ | मुझे ऐसे सपने अक्सर आते हैं जिसमें कोई कर्मचारी अपनी तनख्वाह काटने की शिकायत लेकर मेरे पास आया है, और मैं सोचती हूँ की इसकी तनख्वाह तो मैंने काटी नहीं, ये कैसे हुआ ! असल में हर महीने ऐसी एक आधा शिकायतें सच में आती ही रहती हैं, इसलिए मैं खूब ध्यान से काम करती हूँ, ताकि इस महीने perfect salary sheet बन सके, परन्तु हर महीने एक नयी परेशानी जरूर खड़ी होती है | काम के ऊपर अत्यधिक सतर्कता बरतने से ही शायद मेरे दिमाग में वो इस कदर हावी हो जाता है की सपनों में भी वही दिखता है |

क्या इन सपनों की आप ऐसी व्याख्या कर सकते हैं जिसे देख कर ईश्वर भी अपने ईश्वर को याद करने पर बाध्य हो जाये ?? Whistle

noorfr
Posted: Wednesday, March 9, 2011 1:09:24 PM

Rank: Advanced Member

Joined: 1/11/2011
Posts: 196
Neurons: 4,341
Location: New Delhi, NCT, India
सच तो यह है गुंजिका कि इस सूत्र को शुरू करने के बाद मुझे लगा कि मुझे इस मामले में टांग नहीं अड़ानी चाहिये थी. सपने मेरे लिये जो अर्थ रखते हैं, सामान्यतः दूसरे लोग उस तरह से नहीं सोचते हैं. मैंने भी अपने सपनों पर बहुत सर पटका है, और अब तो मैं अपने सपनों से डरने भी लगा हूँ. फिर भी यह तो कह ही सकता हूँ कि मेरे सपने अधिकांशतः मेरे वास्तविक जीवन से तो अच्छे ही हैं. बल्कि बहुत अच्छे हैं.

फिर सपने को समझने के लिये केवल सपने को जानना ही काफ़ी नहीं होता. वर्तमान व भूत के जीवन को भी समझना पड़ता है. और कोई किताब पढ़ कर सपने नहीं समझे जा सकते. सब के सपनों के अलग अर्थ होते हैं. अधिकतर सपने तो हमारी वर्तमान समस्याओं को सुलझाने में ही अटके रहते हैं. जैसा कि आप ने भी लिखा है, कि दिन भर जो काम आप करती हैं, सपनें में भी वही देखती हैं.

बंद दरवाज़े और टूटी हुई सीढियां भी ज़िंदगी की परेशानियां ही हैं, और अचानक वहाँ से बाहर निकाल आना दिल में बसी वह उम्मीद है जो आदमी को जिंदा रखती है, कि एक दिन सब ठीक हो जायेगा. फिर भी इस सपने पर और बात कर सकते हैं अगर आप ने इसे बार बार देखा है. तब आप को अपना सपना ठीक से लिखना पड़ेगा. दरवाज़े कैसे थे, सीढियां किस तरह से टूटी थी, हर बार एक सी थीं या अलग अलग, और सब से ज़रूरी बात... हर बार जब आप अचानक बाहर आयीं तब आप ने अपने आप को कहाँ पाया. यह याद करना बहुत ज़रूरी है क्योंकि मेरे हिसाब से हर बार आप को एक नई जगह पर होना चाहिये.

इस सपने पर अगर आप आगे बढ़ना चाहती हैं तो बोलिए. इसी पर बात करते हैं. अगर नहीं तो फिर हम आप के toilets में घुसेंगे. श्रीरर ने जो लिखा है अधिकतर वही होता है, किन्तु उसी प्रकार की और भी बातें हो सकती हैं. scary सपने अगर बचपन के हैं तो उन्हें याद रखना बेकार है. अगर बाद के हैं तो उन्हें भी देखते हैं. कुछ भी हो, सपने हमारा कुछ बना या बिगाड़ नहीं सकते. हाँ, वह हमें कुछ समझा ज़रूर सकते हैं......
Gunjika
Posted: Thursday, March 10, 2011 5:12:29 AM
Rank: Advanced Member

Joined: 1/10/2011
Posts: 376
Neurons: 1,127
Location: India
हाँ मुझे इस पर चर्चा करनी है, पर आज नहीं, आज मेरे सर में भयानक दर्द है |
noorfr
Posted: Thursday, March 10, 2011 9:44:07 AM

Rank: Advanced Member

Joined: 1/11/2011
Posts: 196
Neurons: 4,341
Location: New Delhi, NCT, India
हम इन्तेज़ार करेंगे.... दुआओं के साथ,
Gunjika
Posted: Saturday, March 19, 2011 2:49:33 AM
Rank: Advanced Member

Joined: 1/10/2011
Posts: 376
Neurons: 1,127
Location: India
बहुत दिन हो गए, सोचते सोचते कि आज लिखूंगी, पर मैं हूँ बेहद आलसी| चलिए आज बता ही दूं :
उन सपनों में मैं अक्सर ही किसी खँडहर जैसी जगह पर होती थी, या कोई पुरानी सी हवेली नुमा जगह | इनमे कहीं भी दरवाजे, सीढियाँ या खिड़कियाँ दिखाई दे जाती थीं जैसे आजकल के विडियो गेम्स में होती हैं, पर मैंने विडियो गेम्स कभी नहीं खेले, इसलिए आप ये नहीं कह सकते कि ये उनका असर है | सीढियाँ चलते चलते अचानक ख़तम हो जाती हैं, या दरवाजों का आकार उनमे घुसने की इजाजत नहीं देता | मुझे आगे का रास्ता दीखता था, मगर उस तक पहुँचाने वाली सीढ़ी या दरवाज़ा पार करना असंभव होता था | आपने शायद इन्टरनेट पर एक बेवकूफ आर्किटेक्ट कि बनाई हुई सीढियों का चित्र देखा होगा, मुझे यकीन है, श्री ने जरूर देखा होगा, और वो शायद मदद करें | अगर नहीं तो आपने फिल्म एक दूजे के लिए जरुर देखी होगी, उसमे भी एक खँडहर मकान था, कुछ वैसा ही | कहने का अर्थ है कि उन जगहों को बनाने वाला कोई बेहद पागल इंसान हो सकता है जिसने इमारत के नाम पर मकड़जाल बना दिया है, बिलकुल असम्भव सा निर्माण | मैं परेशान हो जाती थी, कैसे जाऊं ? पर अचानक ही मैं खुद को उस जगह से बाहर पाती थी, जैसे किसी अज्ञात शक्ति ने मुझे वहां से उड़ा कर बाहर रख दिया हो, जैसे हैरी पॉटर की किताबों में वो एक जगह से दूसरी जगह पहुँच जाते हैं |

खैर वक़्त बदला और मेरी सभी परेशानियाँ भी धीरे धीरे ख़त्म होती गयीं | मेरा असली जीवन भी चमत्कारों से भरा है , ठीक मेरे सपनों की तरह | आप यकीन नहीं करेंगे, पिछले महीने मैं जैसलमेर घूमने गयी थी, वहां मैं कुलधरा नामक जगह पर गयी थी, जो खँडहर हो चुका एक गाँव है | वहां की उजड़ी हुई हवेलियाँ देखते हुए मुझे लगा कि ये तो मैंने देखी है , ठीक वैसी ही उलटी पुलटी सीढियाँ और दरवाजे | अब मैं क्या कहती | आप ही कहिये !


EDIT ADD: ये जगह हर बार अलग होती थी, और मुझे ठीक से नहीं याद कि क्या मैं हर बार बाहर आ पाती थी | पर जो सपना मुझे सबसे अच्छी तरह याद है , और जो इन सपनों की लगभग आखरी कड़ी थी , उसमें बाहर आने पर मैं ठीक उस इमारत के बाहर खड़ी थी, एक खूब हरी घास से भरी हुई जगह, जहाँ से मैं अपनी मर्ज़ी से कहीं भी जा सकती थी | नूर, मुझे महसूस हो रहा है कि आपसे बातें करने के क्रम में मुझे बहुत कुछ ठीक से समझ में आ रहा है | आपका बहुत बहुत धन्यवाद मुझे झेलने के लिए |
noorfr
Posted: Saturday, March 19, 2011 4:18:24 AM

Rank: Advanced Member

Joined: 1/11/2011
Posts: 196
Neurons: 4,341
Location: New Delhi, NCT, India
झेलने की कोई बात नहीं है गुंजिका. मैं आप के सपने झेल लेता हूँ, आप मेरे सपने झेल लेना.

मुझे थोड़ा समय चाहिये जो आपने सपना लिखा है उस पर. मुझे इसे कई बार पढ़ना पड़ेगा, फिर शायद कुछ लिख सकूँ. कृपया प्रतीक्षा करें.
noorfr
Posted: Tuesday, March 22, 2011 2:38:25 PM

Rank: Advanced Member

Joined: 1/11/2011
Posts: 196
Neurons: 4,341
Location: New Delhi, NCT, India
१. मैंने कभी कोई ऐसा वीडियो गेम नहीं खेला जिसमें सीढियां हों, और न ही इंटरनेट पर ऐसा रेखाचित्र देखा है. फिल्म एक दूजे के लिये भी नहीं देख सका था क्योंकि जब यह फिल्म आई थी मेरी उम्र इतनी नहीं थी कि मैं ऐसी फिल्म देख सकूँ जो केवल व्यस्क दर्शकों के लिये हो. तो इन सब मामलों में तो मैं फ़ेल हो गया. मगर आप ने सपने में क्या देखा, वह मैं देख सकता हूँ. मुझे किसी उदहारण की आवश्यकता नहीं है.

२. जैसा कि आप ने लिखा है - "कि उन जगहों को बनाने वाला कोई बेहद पागल इंसान हो सकता है जिसने इमारत के नाम पर मकड़जाल बना दिया है, बिलकुल असम्भव सा निर्माण.” तो बहन जी. बनाने वाली तो आप ही हैं, जिसने यह सपना बुना है. आप के ही दिमाग का निर्माण है यह.

३. मैंने आप को लिखा था कि मेरे लिये यह जानना आवश्यक है कि हर बार जब आप बाहर आयीं तो आप ने अपने आप को कहाँ पाया. असल में बाहर तो आप हर बार आई होंगी {बशर्ते कि बीच में आप कि आँख न खुल गई हो}, मगर आप को याद नहीं रहा होगा. अब चूँकि यह बात आप भूल चुकी हैं, इस लिये हो सकता है कि उन खंडहरों का रहस्य, रहस्य ही रह जाए.

४. अधिकतर लोग तो यही कहेंगे कि ये उलझे उलझे खंडहर केवल आप के जीवन की उलझनें हैं. हो सकता है वे केवल उलझनें ही हों. मगर वह कुछ और भी हो सकते हैं. वह कुलधरा के खंडहर भी हो सकते हैं. आप फिर से अपने दिमाग के पीछे उन कुलधरा के खंडहरों में ले जाईये. याद करिये कि क्या वहाँ आप को ऐसा लगा था कि आप अपने घर आ गई हैं. क्या आप को किसी दरवाज़े के देख कर ऐसा लगा था कि आप को पता है कि उसके पीछे क्या है.

५. एक ही सपना आप ने बताया है कि बाहर आकर आप ने अपने को प्रकृति की गोद में पाया जहाँ आप स्वछन्द विचिरण कर सकती हैं. यह अंत के सपनों में से ही एक हो सकता है, क्योंकि इसमें आप अपने इस जीवन से आगे चली गई हैं. और आप माने या न माने, यह एक बहुत ही अच्छा सपना है.

६. कुछ और याद करने की कोशिश करें. क्या कभी आप बाहर आईं तो आप को हर तरफ पानी नज़र आया है. या आप ने ऊंची लहरों को अपनी तरफ आते देखा है. // कभी बाहर आने पर आप को कोई आदमी मिला है जिसे देख कर आप को कोई ख़ास अनुभूति हुई हो.

७. अगर ऊपर पॉइंट # ४ में आप का उत्तर हाँ में है तो कहानी # ५ पर रुक जायेगी और पॉइंट # ६ बेकार है. इस लिये पहले कुलधरा के खंडहरों में जाईये. अगर उससे आप अपने आप को नहीं जोड़ पातीं {जिस तरह मैंने लिखा है उस तरह}, तब आप को मेरे # ६ पर ध्यान देना होगा. यह फैसला हो जाए, फिर मैं # ५ को बताऊंगा कि वह आप का भूत है, या भविष्य.
Gunjika
Posted: Wednesday, March 23, 2011 2:06:39 AM
Rank: Advanced Member

Joined: 1/10/2011
Posts: 376
Neurons: 1,127
Location: India
I wanted to make it clear to everyone reading this thread, that this discussion is only meant for satisfying the intriguing curiousity that is generated by the unexplained phenomena of Dreams and I do not support any superstition or controversy arising from this.

Noor, हम सीधे नंबर ३ से बात शुरू करते हैं :

3.मुझे बिलकुल याद नहीं है कि मैं हर बार बाहर exactly कहाँ होती थी, मगर इतना यकीन है कि ये जगह हर बार अलग होती थी | हरा भरा घास का मैदान, धीरे धीरे मेरे कॉलेज के GCR का मैदान बन गया था जहाँ लड़कियों के झुण्ड आपस में बतियाते हुए इधर उधर फैले थे , कुल मिला कर मुझे सुकून मिला था |
4. कुलधरा के खंडहर मेरे सपनों से मिलते जुलते थे, उन्हें देखने से पहले तक मैं समझती थी कि ऐसा विचित्र निर्माण सचमुच में हो, यह असंभव है | वहां जाकर मुझे अच्छा लगा क्योंकि मैं बरसों से अपने गाँव नहीं गयी, और कुलधरा की धूल मिट्टी ने मुझे अपने गाँव की याद दिला दी | इसके अलावा मुझे नहीं लगता कि कोई अलग अनुभूति मुझे हुई या ऐसा नहीं लगा कि मुझे पता है की किसी दरवाजे के पीछे क्या है |
5. मैं बिलकुल मान रही हूँ कि यह एक अच्छा सपना है | साथ ही आपसे यह निवेदन है कि कोई भी बुरी बात भविष्य के सन्दर्भ में मुझे न बताएं, मैं अज्ञानी ही रहना चाहती हूँ, क्योंकि अज्ञानता में सुख है |
6. पानी के सपने मुझे आते थे, नहीं पता कि ये उन सपनो से जुड़े हैं या नहीं | पर ये बेहद घबरा देने वाले होते थे| एक बार मैंने देखा कि एक बहुत बड़ी सी क्रेटर नुमा सूखी जगह है, जहाँ बीचोबीच एक नलका लगा है, जो खुला हुआ है | मैं उसे बंद करने गयी, मगर उस तक पहुँचते पहुँचते पूरा क्रेटर भर गया, चारों ओर पानी ही पानी और मैं जैसे डूबने ही वाली थी | ऐसे बेहद ज्यादा पानी वाले सपने भी मुझे तब खूब आते थे, पर ये सब लगभग एक साथ ही बंद हो गए | कभी कोई इंसान मिला हो ये भी मुझे नहीं लगता, हाँ एक बार पानी से भरी cone shaped valley में एक बड़ा सा हरे रंग का सांप दिखा था, जिसे याद करके मैं अब तक डरती हूँ |

अब कहिये ?
srirr
Posted: Wednesday, March 23, 2011 2:34:40 AM

Rank: Advanced Member

Joined: 12/29/2009
Posts: 8,507
Neurons: 484,288
मैं लिखना चाह रहा था यहाँ, पर लिख नहीं रहा था. कारण कुछ भी नहीं. बस यू ही, शायद मैं सही शब्द नहीं जोड़ पा रहा था.

जैसा मैंने पहले भी कहा था कि सपने वास्तविक नहीं होते, लेकिन वास्तविकता से उनका कुछ ना कुछ संपर्क जरुर होता है. हम जो भी देखते हैं, सुनते हैं, पढ़ते हैं, या कई बार कल्पना करते हैं, वो हमारे अचेतन या अर्धचेतन मन में बैठ जाता है. हमें इसका आभास भी नहीं होता, और हमारे मानस-पटल पर कोई कहानी चित्रित हो जाती है.

इसके अतिरिक्त, हमारे सपनो का कोई एक ही आयाम हो, आवश्यक नहीं. अलग-अलग कई कड़ियों का समन्वय हो सकता है स्वप्न. जैसे, मैंने बचपन में कहानी पढ़ी फैंटम की, स्कूल में किस्से पढ़े भगत सिंह के, पिक्चर देखि अक्षय कुमार की, और कल मेरे पडोसी से कहा-सुनी हो गयी गली में गाडी खड़ी करने को लेकर. मैं ये सारी बातें भूल गया, और मुझे कोई समस्या नहीं रही. लेकिन हो सकता है कि १०-१२ महीने बाद अचानक से अर्धचेतन मन में दबी ये सारी अलग-अलग बातें मेरे सपने में एक साथ आ जायें, जिसमें मैं गाडी लेकर स्टंट करूँ और भगत सिंह को मार दूं. (क्षमा सहित). इसका कोई तार्किक आधार नहीं हो, फिर भी मेरा अनुभव ऐसा हो. इन सारी घटनाओ के दौरान मैंने कुछ ऐसा सोचा होगा जो मेरे अचेतन मन में स्थापित हो गया हो. हो सकता है कि वो भावना भी मेरे सपने में दृष्टिगोचर हो जाये. जैसे मेरी ये कल्पना कि मेरा कोई बहुत बड़ा बंगला हो, जिसमें २०-३० कमरे हो, सामने तरणताल हो, किसी ख़ूबसूरत घाटी में मेरा घर हो, इत्यादि इत्यादि.

मुझे लगता है गुन्जिका, कि आपके साथ भी ऐसा ही कुछ हुआ होगा. आपने कभी कोई खंडहर नहीं देखा, लेकिन शायद कोई कहानी पढ़ी हो, किसी परीकथा में या फंतासी में.

ऐसा ही पानी के विषय में भी हो सकता है. कभी बचपन में बाथरूम में नहाते वक़्त शायद गिर गयी हो, या गरम पानी से जल गयी हो, या पापा मम्मी डांटते हो कि बाथरूम में नलका खुला नहीं छोड़ना, पानी बर्बाद हो जायेगा. कभी नलका खुला छोड़ा नहीं हो, लेकिन ये छोटा सा भय अंतर्मन में कही दबा हो.
Gunjika
Posted: Wednesday, March 23, 2011 3:07:20 AM
Rank: Advanced Member

Joined: 1/10/2011
Posts: 376
Neurons: 1,127
Location: India
हाँ श्री , आप जो कह रहे हैं मेरा मानना भी वही है | पर मानव मन कभी कभी कल्पनाओं की कुलांचे मारता है, तो यही लगता है कि हो सकता है बेबात की बात में भी कुछ मतलब निकल आए | फिर हम जिस समाज में पले बढे हैं, वहां औरतें अक्सर बैठकर सपनों की चर्चा करके ये निष्कर्ष निकालती दिखीं कि फलां के साथ ऐसा होगा कि वैसा होगा | With due regards to Noor, यहाँ हम जो चर्चा कर रहे हैं, वह तो निर्दोष मनोरंजन की सीमा तक है और हम कुछ तय नहीं कर रहे |
srirr
Posted: Wednesday, March 23, 2011 4:05:45 AM

Rank: Advanced Member

Joined: 12/29/2009
Posts: 8,507
Neurons: 484,288
एक और बात. पहले आपके सपने में खंडहर आते थे, फिर धीरे धीरे वैसे सपने कम हो गए, और आप देखने लगी एक बाग़, झरना, वगैरह वगैरह. ये सपने भी असल ज़िन्दगी कि तरह निकले.
जब जीवन में परेशानिया ज्यादा थी, शायद करियर की या पारिवारिक, तब खंडहर वाले सपने थे.....जैसे जैसे परेशानियाँ कम हुईं, सपनों का प्रारूप भी बदलने लगा.

क्या ये सच नहीं है?
अर्थात असल जीवन की स्थिति के अनुसार सपनों का रंग-रूप बदलने लगा.
Gunjika
Posted: Wednesday, March 23, 2011 4:29:03 AM
Rank: Advanced Member

Joined: 1/10/2011
Posts: 376
Neurons: 1,127
Location: India
हाँ ये बिलकुल सही है, और मैंने भी अपने स्वप्नों कि व्याख्या इसी आधार पर की है, मैं बस ये जानना चाहती हूँ कि इनके और क्या dimensions हो सकते हैं |
srirr
Posted: Wednesday, March 23, 2011 4:52:59 AM

Rank: Advanced Member

Joined: 12/29/2009
Posts: 8,507
Neurons: 484,288
मेरे नजरिये से संभवतः और कुछ नहीं. एक उदहारण देना चाहूँगा.
किसी गर्भवती स्त्री को सलाह दी जाती है कि वो अपने कमरे में सुन्दर बच्चो के, फूल के, प्रकृति के चित्र लगाये, ताकि ज्यादा-से-ज्यादा समय उन पर नज़र पड़े. इसका उद्देश्य यही होता है कि वो अपने सपनों में कुछ भी प्रतिकूल नहीं देखे जिसका प्रभाव उसके होने वाले शिशु पर पड़े.

सामान्य मनुष्य को भी यह सलाह दी जाती है कि वो सोने से पूर्व अपने पैरो को ठन्डे पानी से धो कर थोड़ी देर किसी अच्छी और प्रभावशाली चीज़ (सामान्यतः ईश्वर) का स्मरण करे. इससे सपनों की सीमा अनुकूल वातावरण में सीमित रहती है, मन शांत रहता है.

निष्कर्ष मात्र इतना है कि हमारे स्वप्न हमारे दिन-प्रतिदिन कि घटनाओं से प्रेरित होते हैं.
noorfr
Posted: Wednesday, March 23, 2011 10:50:18 AM

Rank: Advanced Member

Joined: 1/11/2011
Posts: 196
Neurons: 4,341
Location: New Delhi, NCT, India
समस्या.... समस्या... समस्या..... हम्म्म्मम....

हर चीज़, हर बात बीच में आ कर खड़ी हो गई है. गुंजिका. अगर जीवन में कभी सचमुच आप के हाथ के बने पकौड़े खाने का सौभाग्य मिला तो मैं आप से ज़रूर एक cross-question session करूँगा. इस खंडहरों में कुछ है ज़रूर, जो मुझे अभी नज़र नहीं आ रहा है. और आप डर क्यों रही हैं जी कि मैं कुछ बुरा न कह दूँ. सपने कभी बुरे नहीं होते गुंजिका. और अगर हों भी, तो जो चीज़ आँख खुलते ही टूट जाए वह आप का हमारा क्या बिगाड़ लेगी?

आप ने लिखा है कि आप को यकीन है कि खंडहरों से बाहर हर बार आप एक नई जगह पर होती थीं. मैं तो पहले ही ऊपर लिख चुका हूँ कि मेरे हिसाब से आप को हर बार एक नई जगह पर होना चाहिये. बार बार सपने में अपने आप को एक ही खंडहर में पाना, और हर बार एक नई जगह पर बाहर आना ही इन सपनो को अर्थ दे रहा है गुंजिका. और मैं यह हरगिज़ नहीं कह रहा हूँ कि कोई बुरा अर्थ है. असल में बुरा तो यहाँ कुछ है ही नहीं. जब भी आप बाहर आईं तो जो कुछ भी आप ने देखा, उसमें भविष्य को लेकर कोई इशारा होना चाहिये कि जीवन के किस मोड़ पर हमें कुछ ऐसा मिलेगा जिसमें हमारी समस्याओं का कोई समाधान निहित होगा. वह सपना हमें बताने की कोशिश करता है कि हमें वहाँ पर उस समाधान को पकड़ने से चूकना नहीं है. दुर्भाग्य से सपने हमें याद ही नहीं रहते, और जो याद रहते भी हैं उन्हें हम समझ नहीं पाते.

कुलधरा को drop कर दीजिए. पानी वाले सपनों में नलके वाला सपना तो इससे कहीं से सम्बंधित नहीं लग रहा. हरा सांप ज़रूर परेशान कर रहा है मुझे. सब से मज़े की बात है आप का उससे डरना. खैर. सपने वाले सांप से डरना बेकार है, लेकिन जीवन में अगर कोई हरा सांप मिल जाए तो ज़रूर वहाँ से भाग लीजियेगा.
raheeshapn@gmail.com
Posted: Wednesday, October 24, 2012 6:48:55 AM
Rank: Newbie

Joined: 10/24/2012
Posts: 1
Neurons: 3
Location: India
srirr wrote:
एक और बात. पहले आपके सपने में खंडहर आते थे, फिर धीरे धीरे वैसे सपने कम हो गए, और आप देखने लगी एक बाग़, झरना, वगैरह वगैरह. ये सपने भी असल ज़िन्दगी कि तरह निकले.
जब जीवन में परेशानिया ज्यादा थी, शायद करियर की या पारिवारिक, तब खंडहर वाले सपने थे.....जैसे जैसे परेशानियाँ कम हुईं, सपनों का प्रारूप भी बदलने लगा.

क्या ये सच नहीं है?
अर्थात असल जीवन की स्थिति के अनुसार सपनों का रंग-रूप बदलने लगा.
raheesh saudagar
Users browsing this topic
Guest


Forum Jump
You cannot post new topics in this forum.
You cannot reply to topics in this forum.
You cannot delete your posts in this forum.
You cannot edit your posts in this forum.
You cannot create polls in this forum.
You cannot vote in polls in this forum.